ऐसी भी क्या मजबूरी ? प्राचार्यों को बना दिया प्रभारी शिक्षा अधिकारी, मुंह ताकते रह गए सीनियर अफसर, चुनौती देने की तैयारी में पेरेंट्स एसोसिएशन

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रायपुर। शिक्षा विभाग ने बुधवार को ट्रांसफर लिस्ट जारी की. जिसमें बिना फूल फ्लैश शिक्षा अधिकारी के फिर से प्राचार्यों को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बना दिया गया है. इसको लेकर छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन ने सवाल खड़ा करते हुआ कहा है कि नियमों को दरकिनार कर प्राचार्यों को प्रभार सौंप दिया गया है. आखिर शिक्षा विभाग की क्या मजबूरी है कि जो पिछली सरकार ने किया वो मौजूदा सरकार में भी दोहराया जा रहा है. शिक्षा विभाग के इस फैसले को अब पैरेंट्स एसोसियेशन कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में है.

सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्ट आदेश दिया है कि नियमित पद पर किसी कनिष्ठ को चालू प्रभार नहीं सौंपा जा सकता है, नियमित पदों पर सिर्फ जिले से वरिष्ठों को ही चालू प्रभार सौंपा जा सकता है. बावजूद इसके स्कूल शिक्षा विभाग ने ठीक आचार संहिता लागू होने से पूर्व बुधवार को जिला शिक्षा अधिकारी के नियमित रिक्त पदों पर कनिष्ठ प्राचार्यों को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बना दिया गया है.

छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष् क्रिष्टोफर पॉल का कहना है कि स्कूल शिक्षा विभाग के इस आदेश को न्यायालय में चुनौती दिया जाएंगा क्योंकि यह आदेश सामान्य प्रशासन विभाग के स्थायी आदेश दिनांक 14/07/2014 का स्पष्ट उल्लघंन है. साथ ही कहा कि उनके द्वारा लगातार सभी जिम्मेदार मंत्रियों और अधिकारियों से यह निवेदन किया था कि जिला शिक्षा अधिकारियों के नियमित रिक्त पदों पर योग्य और वरिष्ठों की पदस्थापना की जावे. लेकिन सरकार ने नियमों को दरकिनार कर कनिष्ठों को चालू प्रभार सौंप दिया, जो उचित नहीं है.

जो पूर्व में हुआ वो वर्तमान में दोहराया गया

आखिरकार शिक्षा विभाग की क्या लाचारी है ? जिला शिक्षा अधिकारी के लिए योग्यता धारी अधिकारी नहीं मिल रहे हैं. बार-बार प्राचार्यों को प्रभार क्यों दिया जाता है ? पिछली कांग्रेस सरकार में 33 में से 30 जिलों में जूनियर प्राचार्यों को जिला शिक्षा अधिकारी का प्रभार दिया गया था. वहीं अब BJP सरकार में भी दोहराया गया है ? सवाल यह उठता है कि जब जिला शिक्षा अधिकारी पद के लिए योग्यता निर्धारित है नियम कानून बनाए गए हैं तो ये जुगाड़ में शिक्षा विभाग भरोसा क्यों करता है ?

मुंह ताकते रह गए सीनियर

प्रमोश का इंतजार कर रहे सीनियर प्राचार्य को प्रमोशन नहीं मिला और हाथ से जो अधिकार मिलना था. नियमानुसार सीनियर को जिला शिक्षा अधिकारी बनाना था वो भी चला गया सीनियर अधिकारी रहते जूनियरों जिला शिक्षा अधिकारी बनाया गया है

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